Dosto क्या आप हर काम के लिए 'बैकअप प्लान' रखते हैं? हम सोचते हैं 'Plan B' हमें सुरक्षित रखता है... लेकिन साइकोलॉजी कहती है ये अक्सर आपके पहले प्लान को ही डुबो देता है! कैसे? आइए जानें दिमाग का ये हैरान करने वाला खेल।  

अगर ये नहीं तो वो सही..."  ये सोच हमें अक्सर तसल्ली देती है, है ना? नौकरी, रिश्ता, या कोई प्रोजेक्ट... हम हमेशा एक 'सेफ्टी नेट' तैयार रखते हैं। पर क्या ये सच में फायदेमंद है? 

आपका दिमाग है एक 'आलसी' बॉस है ! दोस्तों  जब दिमाग को पता चलता है कि उसके पास 'Plan B' का सुरक्षा जाल है, तो वो 'Plan A' में अपनी पूरी 100% ताकत लगाना छोड़ देता है वो जानता है, "अरे! दूसरा रास्ता तो है ही।" 

और ऐसे आपका पूरा फोकस बिखर जाता है! जब दिमाग दो रास्तों के बारे में सोचता है, तो उसका फोकस बँट जाता है और आप एक लक्ष्य पर पूरी तरह एकाग्र नहीं हो पाते, क्योंकि कहीं न कहीं दूसरा ऑप्शन दिमाग में चलता रहता है।  

आधी-अधूरी कोशिश, अधूरा नतीजा! इसी आधे-अधूरे फोकस की वजह से आप 'Plan A' के लिए वो जी-जान वाली कोशिश नहीं कर पाते जो उसके सफल होने के लिए जरूरी है। नतीजा? 'Plan A' अक्सर फेल हो जाता है।  

क्या आपने कभी इसे खुद महसूस किया है? सोचिए, किसी परीक्षा के लिए दो स्टडी मटेरियल हों, या किसी बिजनेस के लिए दो आइडिया हो और जब एक बैकअप में होता है, तो क्या आप पहले वाले में अपनी पूरी जान लगा पाते हैं? शायद नहीं! 

तो क्या 'प्लान B' रखना ही नहीं चाहिए? ज़रूरी नहीं। साइकोलॉजी सिर्फ ये बताती है कि जब आप 'Plan A' पर काम कर रहे हों, तो उसे ही अपना एकमात्र ऑप्शन मानें और सारी ऊर्जा उसी पर लगाएँ 'Plan B' के बारे में तभी सोचें जब 'Plan A' सच में खत्म हो जाए। 

सफल लोग 'प्लान A' पर क्यों टिके रहते हैं? क्योंकि वे अपने दिमाग को कोई 'भागने का रास्ता' नहीं देते वे जानते हैं कि जब पीछे हटने का कोई ऑप्शन नहीं होता, तभी इंसान अपनी पूरी क्षमता से काम करता है। 

दोस्तों फिर क्या आप दिमाग के ऐसे ही और खेल जानना चाहते हैं? आपका दिमाग ऐसे कई और राज़ छिपाए हुए है जो आपकी सफलता और रिश्तों को प्रभावित करते हैं इन सभी मनोवैज्ञानिक सच्चाइयों को जानने के लिए, मेरा पूरा आर्टिकल पढ़ें | 

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