· दोस्तों कहानी शुरू होती है एक काबिल इंजीनियर कर्नल बड़ोग से उनकी एक छोटी सी गलती थी की वो पहाड़ के दोनों छोर नहीं मिला पाए जिसपर सरकार ने जुर्माना तो सिर्फ 1 रुपया लगाया, पर कर्नल के आत्म-सम्मान पर गहरी चोट लग गई।
अपमान इतना गहरा था कि कर्नल ने उसी अधूरी सुरंग के पास अपनी जान दे दी लेकिन दोस्तों, खेल तो यही से शुरू हुआ... क्योंकि मरने के बाद भी वो वहां से कभी गए ही नहीं!
बड़ोग स्टेशन के वेटिंग रूम में बैठे यात्रियों ने भी अजीब अनुभव किए हैं जैसे की खिड़कियों का अचानक बजना और बिना हवा के दरवाजों का बंद होना... क्या कर्नल आज भी अपना काम पूरा कर रहे हैं?