राम राम दोस्तों मैं हु विकाश राजपूत !!
अक्सर प्यार की शुरुआत जितनी खूबसूरत होती है, कई बार उसका अंजाम उतना ही खौफनाक होता है कानपुर से जुड़ी एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसने न केवल पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी, बल्कि लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) के स्याह पक्ष को भी उजागर किया है।
यह कहानी है एक तरफ़ा जुनून, धोखे और एक ऐसी हत्या की, जिसे अंजाम देने के बाद कातिलों ने लाश को ठिकाने लगाने के लिए प्रकृति के प्रकोप यानी बाढ़ का सहारा लिया था दोस्तों 21 जुलाई 2025 की वो काली रात, जब दो लड़के एक बाइक पर एक भारी ब्लैक सूटकेस लादकर निकले है, उन्हें लगा था कि उनका गुनाह यमुना की लहरों में हमेशा के लिए दफन हो जाएगा ?? लेकिन कहते हैं न कि मुजरिम चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, एक छोटी सी गलती उसे सलाखों के पीछे पहुंचा ही देती है।
Kanpur Live-in Murder 2025
The Beginning: इंस्टाग्राम की दोस्ती और लिव-इन का फैसला
दोस्तों इस पूरी दास्तान की शुरुआत साल 2024 में हुई थी जब 20 साल की आकांक्षा, जो मूल रूप से कानपुर की रहने वाली थी, अपनी बड़ी बहन के साथ कानपुर के बर्रा इलाके में एक किराए के मकान में रहती थी । आकांक्षा एक रेस्टोरेंट में जॉब करती थी और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने के सपने देख रही थी।
इसी दौरान, डिजिटल दुनिया यानी इंस्टाग्राम (Instagram) पर उसकी मुलाकात सूरज नाम के एक लड़के से हुई और सोशल मीडिया पर शुरू हुई यह बातचीत धीरे-धीरे गहरी दोस्ती और फिर प्यार में बदल जाती है और दोनों करीब एक साल तक रिलेशनशिप में रहे और एक-दूसरे के साथ वक्त बिताते रहे ।
रिश्ते को एक साल होने के बाद, दोनों ने अपनी नजदीकियों को और बढ़ाने का फैसला किया और लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) में रहने का प्लान बनाया और आकांक्षा ने अपने घर पर और अपनी बड़ी बहन से यह झूठ बोला कि उसका रेस्टोरेंट मौजूदा कमरे से काफी दूर पड़ता है, इसलिए वह रेस्टोरेंट के पास ही एक किराए का कमरा लेकर रहना चाहती है ।
चूंकि उसकी बहन को सूरज के अस्तित्व के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, इसलिए उसे इस बात से कोई आपत्ति नहीं हुई और इसके बाद आकांक्षा अपने रेस्टोरेंट के पास एक फ्लैट में शिफ्ट हो गई, जहाँ उसका प्रेमी सूरज भी उसके साथ आकर रहने लगा । शुरुआत के दो-तीन महीने तो सब कुछ बहुत अच्छा चला, दोनों अपनी नई जिंदगी को खुशी-खुशी एंजॉय कर रहे थे, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह खुशी बहुत जल्द मातम में बदलने वाली है।

The Red Flags: परिवार की चेतावनी और सूरज का असली चेहरा
लिव-इन में रहते हुए जब कुछ महीने बीते, तो आकांक्षा की बहन को उसकी गतिविधियों पर शक होने लगा और जांच-पड़ताल करने पर उसे सूरज के बारे में पता चला और यह बात घर तक पहुँच गई यानी की आकांक्षा की बहन ने अपनी माँ को इस रिलेशनशिप के बारे में सब कुछ बता दिया । एक माँ होने के नाते, आकांक्षा की माँ ने उसे बहुत समझाया उन्होंने आकांक्षा को आगाह किया कि सूरज उसके लायक लड़का नहीं है और उसे यह रिश्ता खत्म कर लेना चाहिए, यहाँ तक कि उन्होंने उसकी शादी कहीं और कराने का भी भरोसा दिलाया ।
लेकिन उस वक्त आकांक्षा पर सूरज के प्यार का ऐसा नशा चढ़ा था कि उसे अपनी माँ की सही सलाह भी गलत लग रही थी उसने साफ शब्दों में कह दिया कि अगर वह शादी करेगी तो सिर्फ सूरज से, वरना किसी से नहीं करेगी मजबूर होकर माँ ने उसे उसके हाल पर छोड़ दिया।
लेकिन हकीकत ये थी कि माँ का शक सही था सूरज वास्तव में एक अच्छा लड़का नहीं था उसका मकसद आकांक्षा से शादी करना या उसे जीवनसाथी बनाना नहीं था बल्कि आकांक्षा के अलावा भी सूरज के कई अन्य लड़कियों के साथ संबंध थे और उसने आकांक्षा को सिर्फ अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए लिव-इन में रखा हुआ था उसे आकांक्षा से न तो प्यार था और न ही वह उससे शादी करना चाहता था ।
The Fatal Night: 21 जुलाई 2025 की वो खौफनाक घटना
करीब 3 से 4 महीने लिव-इन में रहने के बाद, 21 जुलाई 2025 का दिन इस रिश्ते का आखिरी दिन साबित हुआ क्योकि उस दिन आकांक्षा ने सूरज को किसी दूसरी लड़की के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था और इस धोखे ने आकांक्षा को अंदर तक तोड़ दिया और जब शाम को सूरज जब घर पर लौटा, तो दोनों के बीच जमकर बहस हुई और आकांक्षा ने अब और इंतजार करने से मना कर दिया और सूरज पर दबाव डाला कि वह कल ही उससे शादी कर ले । लेकिन सूरज, जो शादी के नाम से ही भागता था, ने साफ मना कर दिया????
बहस इतनी बढ़ गई कि आकांक्षा ने सूरज को धमकी दे दी। उसने कहा, “अगर तुम मुझसे कल शादी नहीं करोगे, तो मैं तुम्हारे खिलाफ पुलिस केस फाइल करवाऊंगी” । इसी गुस्से और आवेश में आकांक्षा ने सूरज को एक थप्पड़ भी मार दिया और यही थप्पड़ सूरज के अहंकार पर चोट थी और गुस्से में पागल होकर सूरज ने आकांक्षा का सिर जोर-जोर से दीवार पर मारना शुरू कर दिया । यह हमला इतना भयानक था कि आकांक्षा की मौके पर ही मौत हो गई और जब सूरज का गुस्सा शांत हुआ और उसने आकांक्षा की निर्जीव बॉडी देखी, तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी ।

The Disposal Plan: यमुना की बाढ़ और 120 किलोमीटर का सफर
प्रेमिका की हत्या करने के बाद सूरज बुरी तरह घबरा गया और उसने तुरंत अपने दोस्त आशीष को कॉल करके फ्लैट पर बुलाया और कमरे में लाश पड़ी थी और बाहर कानून का डर जिसके बाद दोनों ने मिलकर लाश को ठिकाने लगाने का एक खौफनाक प्लान बनाया। उस समय मानसून के कारण यमुना नदी उफान पर थी और उसमें बाढ़ आई हुई थी इसीलिए उन्होंने सोचा कि अगर बॉडी को नदी में बहा दिया जाए, तो वह बहकर कहीं दूर चली जाएगी और किसी को पता नहीं चलेगा ।
उन्होंने आकांक्षा की डेड बॉडी को उसके ही पसंदीदा ब्लैक कलर के सूटकेस में ठूंस दिया और इसके बाद, सूरज और आशीष उस भारी सूटकेस को बाइक पर रखकर, अपने रूम से करीब 120 किलोमीटर दूर ‘चीला घाट’ के लिए निकल पड़े….. 120 किलोमीटर तक बाइक पर लाश ढोना उनकी आपराधिक मानसिकता को दर्शाता है। चीला घाट पहुंचकर उन्होंने सूटकेस को उफनती यमुना नदी में फेंक दिया और वापस अपने घर आ गए और उन्हें लगा कि उन्होंने सबूत मिटा दिए हैं, लेकिन नियति ने उनके लिए कुछ और ही लिखा था।
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The Digital Clue: वो एक SMS जिसने कातिल को फंसा दिया
लाश को ठिकाने लगाने के बाद, सूरज के पास गलती से आकांक्षा का मोबाइल फोन रह गया था और इसी फोन ने सूरज के दिमाग में एक और चाल रची वह दुनिया और आकांक्षा के परिवार को यह दिखाना चाहता था कि आकांक्षा अभी भी जिंदा है इसीलिए उसी रात, उसने आकांक्षा के फोन से उसकी माँ को एक मैसेज भेजा: “मैंने सूरज से ब्रेकअप कर लिया है, मैं वापस कानपुर आ गई हूँ और अब मैं सूरज से कभी नहीं मिलूँगी” ।
यह मैसेज एक चाल थी, लेकिन यही चाल सूरज के गले की फांस बन गई। मैसेज मिलने के बाद आकांक्षा की माँ ने कई बार कॉल करने की कोशिश की, लेकिन फोन स्विच ऑफ आने लगा इसीलिए माँ की चिंता बढ़ने लगी और अगले दिन, माँ ने एक दूसरे नंबर से आकांक्षा को मैसेज किया। यह वो नंबर था जो काफी महीने पहले आकांक्षा के भाई ने अपनी माँ को दिया था, और आकांक्षा के फोन में यह नंबर ‘भैया’ (भाई) के नाम से सेव था ।

सूरज को यह नहीं पता था कि यह मैसेज माँ कर रही हैं। जैसे ही उसने स्क्रीन पर ‘भैया’ का नाम देखा, उसने तुरंत रिप्लाई कर दिया: “भैया, मैं तुमसे बाद में बात करती हूँ” । बस, यही वो पल था जिसने पूरी पोल खोल दी। आकांक्षा की माँ जानती थीं कि जिस नंबर से उन्होंने मैसेज किया है, वह भले ही बेटे का पुराना नंबर हो, लेकिन फोन अभी उनके हाथ में है। उन्हें यकीन हो गया कि आकांक्षा का फोन उसके पास नहीं है, बल्कि कोई और उसे ऑपरेट कर रहा है ।
Investigation & Struggles: पुलिस की लापरवाही और माँ का संघर्ष
शक गहराने पर आकांक्षा की माँ सीधे उस रेस्टोरेंट में पहुँची जहाँ वह काम करती थी, लेकिन वहाँ पता चला कि वह जॉब छोड़ चुकी है इसके बाद वह उस कमरे पर गईं जहाँ आकांक्षा और सूरज साथ रहते थे लेकिन मकान मालिक ने बताया कि सूरज बहुत पहले ही अपना सामान लेकर जा चुका है, लेकिन आकांक्षा का सामान वहीं पड़ा था । जब माँ ने कमरे की तलाशी ली, तो आकांक्षा का सारा सामान वहीं था, सिवाय उस ‘ब्लैक सूटकेस‘ के सूटकेस का गायब होना किसी अनहोनी का स्पष्ट संकेत था।
इसके बाद घबराकर माँ पुलिस स्टेशन पहुँची, लेकिन शुरुआत में पुलिस का रवैया बेहद निराशाजनक रहा। पुलिस ने यह कहकर मामला टालने की कोशिश की कि लड़की दोस्तों के साथ घूमने गई होगी और रिपोर्ट दर्ज नहीं की लेकिन कई दिनों तक थाने के चक्कर काटने के बाद, आखिरकार 8 अगस्त 2025 को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और इसे प्रेम-प्रसंग में भागने का मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया ।
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The Breakthrough: ASP की एंट्री और सूरज की गिरफ्तारी
हालांकि आकांक्षा की माँ ने हार नहीं मानी बल्कि वह लगातार इंसाफ के लिए भटकती रहीं और अंततः एक एएसपी (ASP) अधिकारी से मिलीं और एएसपी ने मामले की गंभीरता को समझा और 16 सितंबर को फिर से रिपोर्ट दर्ज करवाई । उन्होंने पुराने थाने के स्टाफ को फटकार लगाई और मामले की गहराई से जांच के आदेश दिए और पुलिस की 6 से 7 टीमें अब एक्टिव हो चुकी थीं।

जांच का आधार बना टेक्नोलॉजी
पुलिस ने कॉल डिटेल्स (CDR) और लोकेशन ट्रेस की और जांच में पाया गया कि गायब होने वाले दिन सूरज और आकांक्षा की लोकेशन एक ही थी, और उनकी ‘लास्ट लोकेशन’ चीला घाट (यमुना किनारे) पाई गई इसके बाद से ही आकांक्षा का फोन बंद था। इस सबूत के आधार पर पुलिस ने सूरज को हिरासत में लिया पुलिस की सख्ती के आगे सूरज टूट गया और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया और उसने माना कि शादी के दबाव और पुलिस केस की धमकी से डरकर उसने आकांक्षा को मार डाला और अपने दोस्त आशीष के साथ मिलकर बॉडी को यमुना में फेंक दिया ।
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Conclusion: सूटकेस की तलाश जारी
सूरज के कबूलनामे के बाद पुलिस ने उसके दोस्त आशीष को भी गिरफ्तार कर लिया और आज दोनों जेल की सलाखों के पीछे हैं । लेकिन इस केस का सबसे दुखद पहलू यह है कि पुलिस की तमाम कोशिशों और सर्च ऑपरेशन के बावजूद, आकांक्षा की डेड बॉडी अब तक बरामद नहीं हो सकी है । आशंका जताई जा रही है कि बाढ़ के कारण बॉडी बहुत दूर बह गई होगी या जलीय जीवों ने उसे नुकसान पहुँचाया होगा ।
आज भी एक माँ अपनी बेटी के अंतिम दर्शन और इंसाफ के आस में पुलिस थानों के चक्कर लगा रही है दोस्तों यह केस हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि अगर पुलिस ने वक्त रहते, शुरुआत में ही माँ की शिकायत पर कार्रवाई की होती, तो शायद आज उस लड़की की बॉडी मिल जाती और परिवार को कम से कम अंतिम विदाई का मौका मिल पाता ।
Disclaimer: यह आर्टिकल एक वास्तविक आपराधिक घटनाक्रम (Case Study) पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों को जागरूक करना है। लिव-इन रिलेशनशिप या किसी भी रिश्ते में लाल झंडों (Red Flags) को नजरअंदाज न करें और सुरक्षित रहें सुरक्षित रहे |

मैं विकास राजपूत आपका अपनी वेबसाइट पर स्वागत करता हूं यहां पर आपको मैं काफी ज्यादा बेहतरीन और यूनिक कंटेंट देने की कोशिश करता हूं क्योंकि मैं जिस विषय पर लिखता हूं उसकी मैं पहले बहुत ज्यादा रिसर्च करता हूं उसके बाद ही लिखता हूं इसीलिए आप मुझ पर आँख बंद करके विश्वस कर सकते है |