मेहंदीपुर बालाजी की भूतिया स्टोरी: भारत की सबसे डरावनी कहानी मंदिर के अंदर का भुत

दोस्तों मेहंदीपुर बालाजी एक ऐसा मंदिर है जहां दुनिया के कोने-कोने से लोग अपनी भूत बाँधाओ को दूर करने के लिए आते हैं और ये भी बोला जाता है कि यहां पर खुद बालाजी भगवान भूत प्रेतों को कोड़े मार-मार कर उनकी मुक्ति करते हैं इसीलिए इस मंदिर में हमेशा भूत प्रेतों की रोने की और चिल्लाने की आवाजे आती रहती है जिन्हें आप और कोई भी नॉर्मल व्यक्ति वहां पर जाकर सुन सकता है.

लेकिन दोस्तों ऐसा भी बोला जाता है कि इस मंदिर के प्रांगण में किसी से भी प्रसाद नहीं लेना चाहिए और ना ही मंदिर के प्रांगण में कोई मीठी चीज खानी चाहिए और जब आप दर्शन करके अपने घर की तरफ लौटे तो पीछे मुड़कर आपको बिल्कुल भी नहीं देखना चाहिए और भी इसके अलावा इस मंदिर के बहुत सारे नियम है.

अगर जिन्हें आप फॉलो नहीं करते हैं तो आप पर मनुष्यत और भूतों का साया चढ़ सकता है और दोस्तों इन्हीं नियमों से अनजान एक पति-पत्नी इस मंदिर में जाते हैं लेकिन उनके साथ वहां पर ऐसी घटना घटी जिनके बारे में उन्होंने कभी सोचा नहीं था तो चलिए आज की इस पोस्ट में जानते हैं मेहंदीपुर बालाजी की एक भूतिया स्टोरी के बारे में जो कि आपकी रूह का कांपा देगी।

मेहंदीपुर बालाजी की भूतिया स्टोरी

दोस्तों हमारे इस स्टोरी की शुरुआत होती है साल 2015 से जब राजस्थान राज्य के उदयपुर जिले के एक कपल की जिनकी नई-नई शादी होती है जिनका नाम सुनीता और सुमित था और ये दोनों ही लड़का लड़की शादी होने के बाद काफी खुश रहने लगे परिवार के सभी लोग भी खुश थे क्योंकि परिवार में नई दुल्हन आई थी और नई दुल्हन के आने पर सभी खुश थे लेकिन जैसे ही शादी के तीन-चार महीने गुजरे तो उनके साथ एक अजीब घटना घटी इसके बाद उनकी पूरी जिंदगी ही बदल गई है??

शादी के कुछ दिनों बाद उनके साथ घटी अजीब घटना

दोस्तों जैसे ही सुमित और सुनीता की शादी के तीन-चार महीने गुजरे तो तीन-चार महीना के बाद सुनीता की तबीयत एक दिन अचानक खराब हो गई जिसे पहले तो घर वालों ने सीरियस नहीं लिया क्योंकि ऐसी तबीयत खराब होना तो आम बात है लेकिन जब काफी सारे इलाज करवाने के बावजूद भी सुनीता की तबीयत सही नहीं हुई तब घरवालों को उसकी काफी ज्यादा फिक्र होने लगी लेकिन एक दिन उनके घर पर एक बुजुर्ग रिश्तेदार आते हैं सुनीता से मिलने के लिए और उसका हाल-चाल पूछने के लिए लेकिन जो बात उस बुजुर्ग रिश्तेदार ने बताई उनको बताई तो उसे सुनकर उनकी रूही कांप गई…….

क्या बताया उस बुजुर्ग रिश्तेदारी ने

दोस्तों जैसे ही वह बुजुर्ग रिश्तेदार सुनीता से मिलने के लिए उसके घर आया और जब उसने सुनीता को देखा तब उसने उसके पति सुमित से कहा कि मुझे लगता है तुम्हारी पत्नी बीमार नहीं है बल्कि इस पर कोई भूत प्रेत का साया है यह बात सुनकर सुमित को थोड़ा अजीब लगा कि यह रिश्तेदार ऐसे क्यों बोल रहा है तब उस रिश्तेदार ने सुनीता से पूछा की बेटी क्या तुम शादी की हल्दी वाली रस्म के बाद अपने घर से बाहर कहीं गई थी तब सुनीता ने कहा हां वह पास की ही एक ब्यूटी पार्लर में मेकअप करने के लिए गई थी.

तब उस बुजुर्ग रिश्तेदार ने कहा कि बेटी क्या तुम्हे पता नहीं है क्या हल्दी की रस्म के बाद दुल्हन अपने घर से बाहर नहीं निकलती है और ना ही दूल्हा अपने घर से बाहर निकलता है और अगर दूल्हा दुल्हन अपने घर से बाहर हल्दी की रस्म के बाद निकलते है तो उन पर भूत प्रेत का साया चढ़ जाता है.

लेकिन यह बात सुनकर सुमित को उस पर विश्वास नहीं हुआ उसने सोचा यह ऐसे ही बोल रहा है लेकिन जब उस बुजुर्ग रिश्तेदार ने एक और बात कही तब सुमित हक्का बक्का ही रह गया………

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बुजुर्ग रिश्तेदार ने दी मेहंदीपुर बालाजी जाने की सलाह

उस बुजुर्ग रिश्तेदार ने सुनीता के पति सुमित से कहा कि तुम्हें एक बार मेहंदीपुर बालाजी के दरबार में जाना चाहिए क्योंकि तुम्हें जयपुर दवाई लेने के लिए तो जाना ही है और पास में ही मेहंदीपुर का बालाजी मंदिर है इसीलिए तुम वहां पर चले जाओ और अगर भूत बाधा होगी तो टल जाएगी और अगर भूत बाधा नहीं होगी तो तुम्हारे मेहंदीपुर बालाजी के दर्शन हो जाएंगे इससे जो तुम्हारे मन में शंका है वह भी दूर हो जाएगी लेकिन यहां पर उस बुजुर्ग रिश्तेदार ने गलती ये कर दी कि उन्हें मेहंदीपुर बालाजी के नियम नहीं बताए थे??

मेहंदीपुर बालाजी की भूतिया स्टोरी: भारत की सबसे डरावनी कहानी मंदिर के अंदर का भुत

नियमों से अनजान कपल पहुंचे मेहंदीपुर बालाजी

दोस्तों जब उस बुजुर्ग रिश्तेदार ने उन्हें मेहंदीपुर बालाजी जाने की सलाह दी तो अगले ही दिन दोनों पति-पत्नी अपनी खुद की गाड़ी में मेहंदीपुर बालाजी के लिए निकल पड़े और उन्होंने मेहंदीपुर बालाजी के दरबार में पहुंचकर बालाजी के दर्शन किए और वहां के एक पुजारी से सुनीता के साथ जो भी घटना घटी उन सभी के बारे में बताया और सुनीता के नाम से एक पूजा करवाई इसके बाद दोनों जैसे ही अपने घर की तरफ लौटने लगे तभी जैसे ही दोनों मंदिर के प्रांगण से बाहर निकलने लगे तभी उन्हें पीछे से किसी ने आवाज दी……

दोनों को पीछे ने किसी किसी ने आवाज दी

दोस्तों जैसे ही सुनीता और सुमित मंदिर के प्रांगण से बाहर निकलने लगे तभी उन्हें एक व्यक्ति पीछे से आवाज देता है कि सुनीता बेटी प्रसाद नहीं लोगी क्या तब दोनों वापस मुड़कर देख लेते हैं और दोनों ही प्रसाद लेती है लेकिन उन्हें ये नहीं पता था कि मंदिर के प्रांगण में प्रसाद नहीं लेना चाहिए और ना ही खाना चाहिए और ना ही मंदिर के प्रांगण में घर लौटते समय पीछे मुड़कर देखना चाहिए लेकिन उन दोनों ने पीछे मुड़कर भी देख लिया और मंदिर के प्रांगण में ही प्रसाद खा लिया और दोनों अपने घर की तरफ लौटने लगे लेकिन रास्ते में सुनीता ने अपने पति से कहा कि उस व्यक्ति को मेरा नाम कैसे पता था ??

मैंने तो मंदिर में किसी से अपना नाम नहीं बताया था तब दोनों की काफी ज्यादा बहस हुई और सुमित ने कहा कि किसी ने जब हम पूजा करवा रहे थे तब तुम्हारा नाम सुन लिया होगा और ऐसे ही दोनों की बहस चली और दोनों पहुंच गए उस डॉक्टर के यहाँ जहाँ उन्हें दवाई लेनी थी लेकिन वहां पर वो डॉक्टर उस दिन छुट्टी पर थे इसीलिए उन दोनों ने पास की होटल में रहने का निर्णय लिया लेकिन उस होटल में उनके साथ एक ऐसी घटना घटी जिसके बारे में मुझे सोच कर ही काफी ज्यादा डर लग रहा है ।

दोनों के साथ होटल में घटी अजीब घटना

दोस्तों जैसे ही सुमित और सुनीता अस्पताल से होटल में पहुंचे तो शाम हो चुकी थी और दोनों ही काफी ज्यादा थके हुए थे इसीलिए दोनों ही खाना खाकर तुरंत सो गए क्योंकि दिन भर की उन्हें थकावट थी लेकिन जैसे ही सुबह के 3:00 बजे अचानक सुमित की आंखें खुली तो उसने देखा कि सुनीता बेहोश पड़ी है सुनिता अचेत अवस्था में और अजीब तरीके से बेड पर पड़ी है उसने सुनीता को उठाया सुनीता सुनीता उठो तुम्हें क्या हो गया……

मेहंदीपुर बालाजी की भूतिया स्टोरी: भारत की सबसे डरावनी कहानी मंदिर के अंदर का भुत

लेकिन सुनीता ने कोई भी जवाब नहीं दिया तब सुमित काफी ज्यादा घबरा गया और जल्दी के चक्कर में उसने अपनी गाड़ी की चाबी ली और सुनीता को लेकर अस्पताल की तरफ निकल पड़ा लेकिन उनके रास्ते मे एक जंगल आने वाला था जो की पूरी तरह से सुनसान था और जहां पर उस जंगल में जो घटना उनके साथ घटी उसे देखकर तो आपकी रूह भी काँप जायेगी……..

जंगल में उनके साथ क्या हुआ

दोस्तों जैसे ही सुमित अपनी पत्नी सुनीता को लेकर उस जंगली रास्ते से गुजर रहा था तब जैसी वह जंगल के बीच में पहुंचा तभी उसकी गाड़ी का टायर जोर से फट गया और जल्दी का चक्कर में सुमित स्टेफनी भी नहीं लाया था इसीलिए वह काफी ज्यादा परेशान हो गया और परेशान होकर उसने अपने भाई को फोन मिलाया की भाई ऐसे ऐसे बात हो गई है और ऐसे ऐसे सुनीता बेहोश हो गई है और हम ऐसे जंगल में फंस गए है…

मेहंदीपुर बालाजी की भूतिया स्टोरी: भारत की सबसे डरावनी कहानी मंदिर के अंदर का भुत

अब मैं क्या करूं तब उसके भाई ने कहा कि तू मुझसे बात मत कर फोन काट और जल्दी एंबुलेंस को फोन कर तब सुमित ने एंबुलेंस को फोन किया लेकिन बदकिस्मती से एंबुलेंस का फोन नहीं लग रहा था तब उसने वापस अपने भाई को फोन किया कि भैया एंबुलेंस का फोन नहीं लग रहा है तब उसके भाई ने कहा कि तू जहां भी है वहीं पर गाड़ी को छोड़ दे और लॉक कर दे और फोटो खींचकर मुझे भेज दे.

और किसी से भी लिफ्ट ले और जल्दी से हॉस्पिटल पहुंच लेकिन बदकिस्मती से वहां पर उस समय कोई भी साधन नहीं जा रहा था और सुमित ने अपने भाई की बात मानकर अपनी गाड़ी को वहीं छोड़कर उसकी फोटो क्लिक कर ली और अपने भाई को भेज दी और किसी से लिफ्ट लेने का इंतजार करने लगा……

बालाजी ने बचाई दोनों की जान

दोस्तों जब सुमित को कोई भी साधन आते हुआ नहीं दिखाई दिया तो वह काफी ज्यादा परेशान हो गया और वह बालाजी को याद करने लगा लेकिन तभी उसे अपनी ओर एक ट्रक आता हुआ दिखाई दिया जिससे उसने लिफ्ट मांगी तो ट्रक वाले भैया ने भी उसे लिफ्ट दे दी और दोनों अस्पताल की तरफ जल्दी-जल्दी पहुंचने लगे लेकिन इसी समय उसके भाई का फोन आता है तुम कहां हो तब उसने कहा कि भैया टेंशन लेने की जरूरत नहीं है.

हमें एक ट्रक मिल गया है हम उसमें अस्पताल की ओर जा रहे हैं और अब कोई घबराने की बात नहीं है तब उसके भाई ने कहा तू जल्दी ट्रक से उतर क्योंकि तुम्हारे पीछे कोई बुरी शक्ति पड़ी है तुम यूं ही जंगल में किसी पर विश्वास नहीं कर सकते हो यह बात सुनकर तो सुमित और भी ज्यादा घबरा गया और उसका दिल बहुत तेजी से धड़कने लगा इसके बाद उसने ड्राइवर को देखा तो ड्राइवर गुस्से में लाल आंखें लिए हुए ट्रक को चल रहा था.

और जैसे ही सुमित ने ड्राइवर को ये कहने की कोशिश की की भैया ट्रक रोक तो हम किसी दूसरे साधने में चले जाएंगे तभी उसकी नजर ट्रक के डैशबोर्ड पर रखी हनुमान जी की मूर्ति पर पड़ी जिसके बाद उसकी सारी टेंशन दूर हो गई और उसने अपने भैया को कहा भैया आब टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं है अब हमारे साथ बालाजी है और यह बात सुनकर ड्राइवर ने भी एक मुस्कुराहट सुमित को दे दी और दोनों बहुत ही जल्द अस्पताल में पहुंचे जहां पर सुनीता का इलाज किया और डॉक्टर ने कहा कि ये तो अच्छा हुआ कि तुमने जल्द से जल्द सुनीता को अस्पताल में पहुंचा दिया वरना इसे बचाया नहीं जा सकता था।

सुमित ने बताई भाई को अपनी सारी बातें

जब अगले दिन उसका भाई अस्पताल में पहुंचा तब सुमित ने अपने भाई को सारी बातें बताई कि कैसे-कैसे सुनीता बीमार हुई है कैसे वह अस्पताल पहुंचा लेकिन जब उसके भाई ने पूछा कि तुम्हारे साथ कुछ मंदिर में घटना घटी थी क्या तब उसके भाई ने बताया कि हां जब हम मंदिर के परागण से बाहर आ रहे थे तब किसी व्यक्ति ने हमें पीछे से बोला और हमें प्रसाद दिया उस प्रसाद को हमने खाया और हम वापस आ गए तब उसके भाई ने कहा कि तुमने वहां पर बहुत बड़ी गलती कर दी क्या तुम मेहंदीपुर बालाजी के नियम नहीं जानते हो तब सुमित ने कहा कौन से नियम???

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पहला चैनल- Nirwan Fact
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भाई ने बताइए मेहंदीपुर बालाजी के नियम

तब उसके भाई ने कहा कि मेहंदीपुर बालाजी का एक नियम है कि जब भी मेहंदीपुर बालाजी जाओ तो दर्शन करने के बाद कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए चाहे तुम्हारा कोई रिश्तेदार ही तुम्हें आवाज क्यों ना आवाज दे चाहे कुछ भी हो तुम्हें पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए और ना ही मंदिर के प्रांगण में किसी से प्रसाद ले लेना चाहिए और ना ही उस प्रसाद को खाना चाहिए और तुमने तो मंदिर के प्रांगण में ही प्रसाद खा लिया और पीछे मुड़कर भी देख लिया इसीलिए तुम्हारे पीछे बुरी शक्ति पड़ गई और ये तो तुम्हारे साथ बालाजी का आशीर्वाद था इसीलिए तुम्हारी जान बच गई वरना आज तुम्हारा आखिरी दिन होता…..

कैसे मेहंदीपुर बालाजी में भटकती है आत्माएं

तब उसके भाई ने कहा कि मेहंदीपुर बालाजी में बालाजी की दया से और उनकी कृपा दृष्टि से और उनके तेज की वजह से आत्माएं शरीर को छोड़कर इधर-उधर तड़पती हुई भटकती है और वह किसी इंसान का शरीर ढूंढ रही होती है और जैसे ही उन्हें किसी इंसान का शरीर दिखाई देता है तो वह उसमें घुस जाती है इसीलिए मंदिर में पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए क्योंकि ये आत्माएं किसी की भी आवाज निकाल सकती हैं और किसी में भी प्रवेश कर सकती हैं और तुमने तो पीछे मुड़कर देख लिया था.

इसीलिए कोई बुरी शक्ति तुम्हारे साथ आ गई लेकिन मेहंदीपुर बालाजी की तुम पर कृपया थी इसीलिए तुम्हें कुछ भी नहीं हुआ इसीलिए मेहंदीपुर बालाजी सबके संकट दूर करते हैं तब सुमित ने कहा कि भैया मुझे इन सब बातों के बारे में नहीं पता था लेकिन तब सुमित ने अपने भाई से पूछा की भैया आपको कैसे पता की हमारे पीछे कोई नकारात्मक शक्ति पड़ी है तब उसके भाई ने उसके द्वारा भेजी गयी गाड़ी की फोटो दिखाई जिसमे गाड़ी पीछे एक भुतिया साया साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था ये देखकर सुमित पसीना पसीना हो गया.

मेहंदीपुर बालाजी की भूतिया स्टोरी: भारत की सबसे डरावनी कहानी मंदिर के अंदर का भुत

और उसने दोनों हाथ जोड़कर बालाजी का धन्यवाद दिया कि उन्होंने इसकी और उसकी पत्नी की जान बचाई और इस घटना के बाद दोनों पति-पत्नी और उसका पूरा परिवार फिर से बालाजी के दरबार में गए और मेहंदीपुर बालाजी की कृपया और दया से उनके ऊपर जो भी बुरी शक्ति थी.

वह दूर हो गई और दोनों अब फिलहाल एक खुशी की जिंदगी बता रहे है केवल बालाजी की दया से और अब बालाजी की कृपा दोनों पर है और दोनों खुशहाल है उनका परिवार भी खुश है तो दोस्तों इसीलिए जब भी आप मेहंदीपुर बालाजी जाओ तो वहां के नियमों को विशेष ध्यान रखो क्योंकि वहां के नियम अगर आप ध्यान नहीं रखते हो तो आपके साथ कोई बुरी शक्ति आ सकती है हालांकि बालाजी के आशीर्वाद के वजह से आपके साथ कोई बुरी घटना तो नहीं घटने वाली है लेकिन फिर भी हमें मंदिर के जो नियम है उनका कठिनाई से पालन करना चाहिए तभी हम बुरी शक्ति उसे बच सकते हैं।

निष्कर्ष

दोस्तों में आशा करता हूं कि आपको आज की ये मजेदार हॉरर स्टोरी जरूर पसंद आई होगी मैंने आपको इस पोस्ट के अंदर मेहंदीपुर बालाजी की भूतिया स्टोरी को बहुत ही आसान भाषा में बताया है इसीलिए अगर आपको यह पोस्ट थोड़ी बहुत भी अच्छी लगी हो और मजेदार लगी हो तो इस पोस्ट को एक बार अपने दोस्तों से शेयर जरूर कर दें मैं विकास राजपूत आपसे आज की इस मजेदार पोस्ट से विदा लेता हूं मिलता हूं ऐसी ही दूसरी मजेदार पोस्ट में बहुत ही जल्द बोलो जय श्री राम |