राम-राम दोस्तों, मैं हूँ विकास राजपूत !!
दोस्तों, क्या आप कभी सोच सकते हैं कि एक पुरानी हवेली की चारदीवारी के भीतर कुछ ऐसा भी हो सकता है जो आपकी समझ और विज्ञान की सारी सीमाओं को पार कर दे? हम अक्सर कहानियों में सुनते हैं कि आत्माएं होती हैं, या फिर किसी जगह पर पुरानी घटनाओं की छाप रह जाती है, लेकिन जब वो हकीकत बनकर आपके सामने खड़ी होती है, तो खून जम जाता है…..
आज जो कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ, वो कोई सुनी-सुनाई बात नहीं हैं, बल्कि मेरे उन तीन दोस्तों की दास्तान( Real Horror Story In Hindi 2026 ) है जिन्हें मैंने अपनी आँखों के सामने खो दिया और आज भी जब मैं सोता हूँ, तो वही चीखें मेरे कानों में गूंजती हैं।
काली गढ़ी की भूतिया कहानी
एडवेंचर की शुरुआत
दोस्तों ये बात करीब दो साल पुरानी है जब हम चार दोस्त—मैं (विकास), राहुल, अमित और राजू—कॉलेज के बाद एक ट्रिप प्लान कर रहे थे हम चारों का स्वभाव अलग था राहुल को फोटोग्राफी का शौक था, अमित हमेशा लॉजिक ढूंढता था, और राजू थोड़ा डरपोक था लेकिन ग्रुप के दबाव में कुछ भी करने को तैयार हो जाता था… हमने तय किया कि हम राजस्थान के एक दूरदराज इलाके में स्थित ‘काली गढ़ी’ नाम की एक पुरानी हवेली देखने जाएंगे।
उस हवेली के बारे में इंटरनेट पर बहुत कम जानकारी थी, बस इतना पता था कि 18वीं सदी में वहां के ठाकुर ने अपनी पूरी संपत्ति के मोह में कुछ ऐसा किया था कि आज भी वहां कोई परिंदा भी पर नहीं मारता और स्थानीय लोग कहते थे कि वह हवेली शापित है और सूर्यास्त के बाद वहां जाने वाला कभी वापस नहीं लौटता है।
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काली गढ़ी में प्रवेश
और फिर जैसे ही हम अपनी गाड़ी से उस गांव के करीब पहुंचे, तब हवा का मिजाज बदलने लगा और उस दिन दोपहर के तीन बज रहे थे, लेकिन आसमान में अजीब सी धुंध छाई हुई थी गांव वालों ने हमें चेतावनी दी, एक बूढ़े आदमी ने तो राहुल का हाथ पकड़कर कहा भी था, “बेटा, मौत को बुलावा मत दो, वहां जो गया है वो मिट्टी बन गया है।” लेकिन हम जवान खून थे, हमें लगा ये सब बस डराने के तरीके हैं और हम उसे हवेली की तरफ आगे बढ़ने लगे लेकिन जैसे ही हमने

हवेली के मुख्य द्वार पर कदम रखा तो हमने देखा कि वहां दरवाजा भारी लकड़ी का बना था, जिस पर लोहे की नुकीली कीलें लगी थीं हुई थी और जैसे ही अमित ने उसे धक्का दिया, एक चीखने जैसी आवाज के साथ दरवाजा खुला और अंदर कदम रखते ही एक अजीब सी सड़न की बदबू आई, जैसे बरसों से वहां कुछ सड़ रहा हो और धूल की मोटी परतें जमी थीं और दीवारों पर अजीब-अजीब से चित्र बने थे, जो शायद किसी तांत्रिक क्रिया का हिस्सा थे।
पहली चेतावनी
हालांकि जब शाम ढलने लगी तो हमने तय किया कि हम आज रात यहीं रुकेंगे और राहुल अपने कैमरे से तस्वीरें ले रहा था, तभी उसने चिल्लाकर हमें बुलाया क्योंकि वो हवेली के तहखाने की ओर जाने वाली सीढ़ियों के पास खड़ा था और वहां की दीवार पर खून जैसे लाल रंग से कुछ लिखा था—”जो आया है, वह मेरा है” अमित हंसा और बोला, “यार राहुल, ये सब किसी ने हमें डराने के लिए लिखा होगा” लेकिन तभी राजू को महसूस हुआ कि कोई उसके पीछे खड़ा है उसने मुड़कर देखा तो वहां कोई नहीं था और ये देखकर वो काफ़ी ज्यादा घबरा गया।

रूहानी ताकतों का तांडव
और ऐसे ही रात के दस बजते-बजते माहौल पूरी तरह बदल चुका था हमारे टॉर्च की रोशनी धुंधली पड़ रही थी और अचानक, ऊपर की मंजिल से किसी के चलने की आवाज आई ‘धप-धप-धप’… जैसे कोई भारी जंजीरें खींचकर चल रहा हो पहली अनहोनी राहुल के साथ हुई जब वो एक पुरानी पेंटिंग की फोटो खींचने के लिए दूसरे कमरे में गया था।
तभी हमें अचानक एक जोर की चीख सुनाई दी जिसके बाद हम तीनों दौड़कर वहां पहुंचे, लेकिन कमरा खाली था और राहुल गायब था तभी अमित ने ऊपर की ओर इशारा किया तो हमें देखा की छत से राहुल का शरीर लटका हुआ था, लेकिन उसकी गर्दन 180 डिग्री मुड़ी हुई थी उसकी आँखें पूरी तरह सफेद हो चुकी थीं और वह दृश्य इतना भयानक था कि राजू वहीं जमीन पर बैठकर रोने लगा हमें समझ आ गया कि यहाँ कोई इंसान नहीं, बल्कि कोई पुरानी शैतानी ताकत है।
मौत का खेल
जिसके बाद हम भागकर मुख्य दरवाजे की तरफ लपके, लेकिन वह दरवाजा पत्थर की तरह जम गया था और जब हम दरवाजा खोलने में लगे हुए थे तभी गलियारे के अंत से एक साया उभरता हुआ दिखाई दिया वो साया लंबा, काला और धुंधला था, जिसकी लाल चमकती आँखें सीधे हमारे दिल में छेद कर रही थीं जिसने अमित को हवा में उछाल दिया गया उसका शरीर दीवार से इतनी जोर से टकराया कि उसकी रीढ़ की हड्डी टूटने की आवाज साफ सुनाई दी और उसने तड़पते हुए दम तोड़ दिया।

अब सिर्फ मैं और राजू बचे थे राजू पूरी तरह होश खो चुका था लेकिन फ़िर भी हम दोनों वहां से भागे, लेकिन बार-बार उसी कमरे में लौट रहे थे जहाँ अमित की लाश पड़ी थी लेकिन तभी अचानक फर्श फटने लगा और राजू का पैर उसमें फंस गया हालांकि मैंने उसे खींचने की बहुत कोशिश की, लेकिन अदृश्य हाथों ने उसे नीचे खींच लिया उसकी आखिरी चीख आज भी मेरे कानों में गूँजती है।
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आज भी पीछा करता है वो साया
मैं किसी तरह एक खिड़की से बाहर कूदने में कामयाब रहा लेकिन जब मैंने पीछे मुड़कर देखा तो हवेली की हर खिड़की पर मेरे तीनों दोस्त खड़े थे, जो अब उस हवेली के गुलाम बन चुके थे और आज दो साल हो गए हैं, मैं जिंदा तो हूँ, लेकिन अंदर से मर चुका हूँ और आज मैं अंधेरे कमरे में नहीं सो सकता कभी-कभी मुझे राहुल की आवाज सुनाई देती है जो धीरे से कहता है, “विकास, तू अकेला क्यों बच गया? वापस आ जा” दोस्तों, यह दुनिया वैसी नहीं है जैसी हमें दिखती है कुछ दरवाजे ऐसे होते हैं जिन्हें कभी नहीं खोलना चाहिए। मैं आज भी उस डर के साये में जी रहा हूँ।
दोस्तों क्या आप रूहानी ताकतों( Real Horror Story In Hindi 2026 ) पर विश्वास करते हैं? क्या आपके साथ कभी ऐसा कुछ हुआ है जिसे विज्ञान नहीं समझा सका
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मैं विकास राजपूत आपका अपनी वेबसाइट पर स्वागत करता हूं यहां पर आपको मैं काफी ज्यादा बेहतरीन और यूनिक कंटेंट देने की कोशिश करता हूं क्योंकि मैं जिस विषय पर लिखता हूं उसकी मैं पहले बहुत ज्यादा रिसर्च करता हूं उसके बाद ही लिखता हूं इसीलिए आप मुझ पर आँख बंद करके विश्वस कर सकते है |